भाजपा की सरकार, जिले में तीन विधायक और नगर परिषद की अध्यक्ष भी अपनी—फिर बरगवां में तालमेल का संकट क्यों?बरगवां
बरगवां। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है, सिंगरौली जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं और बरगवां नगर परिषद की कमान भी भाजपा समर्थित नेतृत्व के हाथों में है। इसके बावजूद नगर परिषद में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल का संकट सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नगर परिषद अध्यक्ष प्रमिला वर्मा के नेतृत्व में परिषद चल रही है। ऐसे में पार्षदों और अधिकारियों के बीच यदि मतभेद लगातार सामने आते हैं, तो सवाल केवल अधिकारियों की कार्यशैली पर नहीं, बल्कि अध्यक्ष के नेतृत्व और परिषद पर उनकी पकड़ पर भी उठना स्वाभाविक है।
जब ‘अपनी सरकार’ में भी नहीं बन रही बात!
सत्ता के स्तर पर देखा जाए तो बरगवां के लिए राजनीतिक परिस्थितियां मजबूत हैं। प्रदेश में भाजपा सरकार, जिले में तीन भाजपा विधायक और नगर परिषद में भाजपा समर्थित अध्यक्ष—इसके बाद भी यदि पार्षदों को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर तक जाना पड़े, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा सकता है।
जब सरकार भी अपनी, विधायक भी अपने और अध्यक्ष भी अपनी, तो फिर पार्षदों की शिकायतें सुनने वाला आखिर कौन है?
अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में
नगर परिषद अध्यक्ष केवल बैठकों की अध्यक्षता करने तक सीमित नहीं होतीं। परिषद में पार्षदों और अधिकारियों के बीच समन्वय बनाना, विकास कार्यों को गति देना और जनता से जुड़े मामलों का समाधान कराना भी नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसे में परिषद के भीतर यदि असंतोष बढ़ता है तो अध्यक्ष प्रमिला वर्मा की भूमिका पर सवाल उठना भी लाजिमी है। क्या अध्यक्ष पार्षदों और अधिकारियों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित नहीं कर पा रही हैं? या फिर अधिकारियों पर परिषद नेतृत्व का प्रभाव कमजोर पड़ गया है?
हालांकि इन सवालों का जवाब अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजनीति अपनी जगह, जनता का काम अपनी जगह
बरगवां की जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि परिषद के अंदर किसकी किससे नाराजगी है। जनता को सड़क, नाली, सफाई, रोशनी और विकास कार्य चाहिए।
सवाल सीधा है—जब राजनीतिक ताकत की कमी नहीं है, तो फिर स्थानीय स्तर पर काम कराने के लिए इतनी खींचतान क्यों?
बरगवां की स्थिति कहीं ऐसा संदेश तो नहीं दे रही कि ‘डबल इंजन’ की सरकार के बीच स्थानीय निकाय का इंजन ही तालमेल के अभाव में हांफ रहा है?
अब निगाह इस बात पर है कि अध्यक्ष प्रमिला वर्मा इस नाराजगी को कैसे संभालती हैं और जिले का राजनीतिक नेतृत्व नगर परिषद के भीतर चल रही इस खींचतान को खत्म कराने के लिए क्या भूमिका निभाता है।